Somnath Jyotirlinga:पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ।बारह ज्यतिर्लिंग में पहला सोमनाथ ज्योतिर्लिंग है। ये गुजरात के सौराष्ट्र में समुन्द्र के किनारे स्थित है।
जानें ज्योतिर्लिंग सोमनाथ की महत्ता
- सोमनाथ मंदिर के क्षेत्र में चंद्रदेव ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए तप किया था। चंद्रदेव की तपस्या से शिवजी प्रसन्न होकर यहां प्रकट हुए थे।
- यह मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह के पास स्थित है।
- यह भारत के 12 ज्योतिर्लिंग में से पहला ज्योतिर्लिंग है।
- इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि स्वयं चंद्रदेव ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी।
- इस मंदिर का नाम सोमनाथ पड़ने के पीछे कारण यह है कि चंद्रमा का एक सोम भी है।
- इस मंदिर को 17 बार तोड़ा गया और हर बार इसका पुननिर्माण कराया गया।
- साल 1026 में सुल्तान महमूद गडनवी ने सोमनाथ मंदिर को लूटकर नष्ट कर दिया था।
- 1297 में जब दिल्ली सल्तनत ने गुजरात पर कब्जा किया तो इसे पांचवी बार गिराया गया।
- 1706 में मुगल बादशाह औरंगजेब ने इसे गिरा दिया।
1783 में इंदौर की रानी अहिल्याबाई ने मूल मंदिर से कुछ ही दूरी पर पूजा अर्चना के लिए सोमनाथ महादेव का एक और मंदिर बनवाया। - भारत की आजादी के बाद सरदार बल्लभ भाई पटेल ने समुद्र का जल लेकर नए मंदिर का निर्माण का संकल्प लिया।
- 1 दिसंबर 1955 को भारत के राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया।
सोमनाथ मंदिर का इतिहास क्या है!
मान्यता है कि मंदिर का निर्माण महाभारत काल में चंद्रभागा राजा सोमदेव द्वारा हुआ था। यहां सोमराजा ने शिवलिंग की पूजा की थी और इसे सोमेश्वर नाम से भी जाना जाता था, धार्मिक कथाओं के अनुसार चन्द्रभाग राज्य के राजा भीमदेव ने इसे पुनः बनवाया था। इतिहास में सोमनाथ मंदिर को कई बार आक्रमण का शिकार हुआ था।
सोमनाथ मंदिर की समृध्दता से प्रभावित होकर गजनवी ने इसपर 17 बार हमला कर इसकी संपति लूटी, गजनवी के हमले के बाद गुजरात के राजा भीम और मलवा के राजा भोज ने इसका निर्माण कराया। इसके बाद जब 1297 में दिल्ली सल्तनत ने गुजरात पर कब्जा किया तो इसे फिर से गिराया गया।
सोमनाथ की उत्पति कैसे हुई?
शाप से विचलित और दु:खी सोम ने भगवान शिव की अराधना शुरु कर दी। अन्तत: शिव प्रसन्न हुए और सोम चन्द्र के शाप का निवारण किया। सोम के नष्ट को दूर करने वाले प्रभु शिव का स्थापना यहां करवाकर उनका नामकरण हुआ सोमनाथ। ऐसी मान्यता है कि श्रीकृष्ण भालुका तीर्थ पर विक्षश्राम कर रहें थे।
विशेषता- यह मंदिर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि इसे लगभग 17 बार विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा तोड़ा गया लेकिन फिर भी आज तक बरकरार है। गुजरात का सोमनाथ मंदिर देवों के देव भगवान शिव शंकर को समर्पित है। यह गुजरात के वेरावल बंदरगाह से कुछ ही दूरी पर प्रभास पाठन में स्थित है।
सोमनाथ मंदिर के निचे क्या मिला?
पुरातत्व विभाग का खुलासा: सोमनाथ मंदिर के नीचे 3 मंजिला इमारत और बौध्द गुफाएं है। जमीन से 12 मीटर अंदर तक जांच की गई पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट के मुताबित सोमनाथ मंदिर के नीचे एल शेप की इमारत है।
सोमनाथ का पुराना नाम सोमेश्वर था. मान्यता है कि चंद्रदेव ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी। चंद्रदेव का एक नाम सोम भी है, उन्होने भगवान शिव को ही अपना नाथ-स्वामी मानकर यहां तपस्या की थी, इसलिए इसका नाम सोमनाथ हो गया।
सोमनाथ मंदिर किसने और कब बनवाया?
सोमनाथ मंदिर एक हिंदुओं के लिए एक पावन स्थल है क्योकि मिथको के अनुसार इसे शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों मे से पहला माना जाता है. कहते है कि इसका निर्माण स्वयं चंद्रदेव सोमराज ने किया था, इसका उल्लेख ऋग्देव में मिलता है।
गुजरात के वेरावल बंदरगाह में स्थित इस मंदिर की महिमा और कीर्ती दूर-दूर तक फैली थी, अरब यात्री अल बरुनी ने अपने यात्रा वृतानन्त में इसका विवरण लिखा जिससे प्रभावित हो महमूद गजनवी ने सन 1025 में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया, उसकी संपति लूटी और उसे नष्ट कर दिया।
इसके बाद गुजरात के राजा भीम और मालवा के राजा भोज ने इसका पुननिर्माण कराया. सन 1297 में जब दिल्ली सल्तनत ने गुजरात पर कब्जा किया तो इसे फिर गिराया गया, सोमनाथ मंदिर के पुननिर्माण और विनाश का सिलसिला जारी रहा।
इस समय जो मंदिर खड़ा है उसे भारत के गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल ने बनवाया और पहली दिसंबर को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया।



