
रायपुर. नारायणपुर जिले के कलाकार पंडीराम मंडावी ने पद्म श्री मिलने में खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि ये सिर्फ मेरा सम्मान नहीं हैं, बल्कि पूरे बस्तर का सम्मान है. वहीं, पंडीराम मंडावी को पद्म श्री मिलने पर सीएम विष्णु देव साय ने बधाई और शुभकामनाएं दी हैं. यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें पारंपरिक लकड़ी की शिल्पकला के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है.
पंडीराम मंडावी, जो 65 वर्ष के हैं, गोंड मुरिया जनजाति से संबंधित हैं. वे पिछले पांच दशकों से बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को न केवल संरक्षित कर रहे हैं, बल्कि उसे नई पहचान भी दिला रहे हैं. उनकी विशेष पहचान बांस बांसुरी के निर्माण में है. इसको सुलुर कहा जाता है. इसके साथ उन्होंने लकड़ी के पैनलों पर उभरे हुए चित्र, मूर्तियां और अन्य शिल्पकृतियों के माध्यम से अपनी कला को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया है.
शिल्पकला पंडीराम मंडावी का पुस्तैनी काम है, जिसे वो आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने 12 वर्ष की आयु में अपने पूर्वजों से यह कला सीखी और अपने समर्पण व कौशल के दम पर छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. एक सांस्कृतिक दूत के रूप में उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन आठ से अधिक देशों में किया है. साथ ही कार्यशाला के जरिए एक हजार से अधिक कारीगरों को प्रशिक्षण देकर इस परंपरा को नई पीढ़ियों तक पहुंचाने का कार्य किया है.
पंडीराम की बनाई कलाकृति कैंब्रिज म्यूजियम में लगी है. ये बस्तर के कलाकार का बड़ा सम्मान है. पद्म श्री से पहले पंडीराम को कई और सम्मान मिल चुके हैं. छत्तीसगढ़ शासन ने भी उन्हें हस्तशिल्प के क्षेत्र में शिल्प गुरु की उपाधि से सम्मानित किया है.



