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NAGESHWAR JYOTIRALINGA: द्वारकापुरी से 17 किलोमीटर दूर स्थित है शिव का नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

NAGESHWAR JYOTIRALING: नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

NAGESHWAR JYOTIRALINGA: नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात के द्वारका धाम से 17 किलोमीटर बाहरी क्षेत्र में स्थित है। नागेश्वर का अर्थ है नागो का देवता, जिन लोगों की कुंडली में सर्प दोष होता है उन्हे यहां धातुओं से बने नाग-नागिन अर्पित करना चाहिए, मान्यता है कि इससे दोष से छुटकारा मिल जाता है।

मान्यता

शिवपुराण की रूद्र संहिता में शिव जी का एक नाम नागेश द्वारकावेन बताया गया है। शिव जी नागों के देवता हैं और नागेश्वर का पूर्ण नागों का ईश्वर है।

नागेश्वर मंदिर एक प्रसिद्ध मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है। श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंग में आठवा स्थान है। 

तीन किलोमाटर दूर से दिखाई देता है नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर। समूचे भारत में भगवान भोलेनाथ के 12 ज्योतिर्लिंग में से 10वां ज्योतिर्लिंग नागेश्वर ज्योतिर्लिंग माना जाता है, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास बहुत पुराना है, यह ज्योतिर्लिंग भारत के गुजरात राज्य में द्वारकापुरी से 17 किलोमीटर दूर स्थित है, द्वारकापुरी में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग परिसर में भगवान शिव की एक बहुत बड़ी ध्यान मुद्रा में विशाल प्रतिमा बनाई गयी है. जिसकी वजह से यह मंदिर 3 किलोमीटर दूर से दिखाई देने लगता है, भगवान भोलेनाथ की मूर्ति करीब 80 फिट ऊंची और 25 फिट चौड़ी है इस मंदिर का मुख्य द्वार अत्यंत साधारण और सुंदर बनाया गया है।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व व इतिहास

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग को भगवान शिव के 10 वीं ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है, मान्यताओं के अनुसार नागेश्वर का मतलब नागों का इश्वर या नागों का देवता वासुकी है जो भगवान शिव के गलें में माला के रूप में रहता है, मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से सभी प्रकार के रोगो से मुक्ति पाई जा सकती है। हिंदु धार्मिक पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि नागेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन मात्र से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है, ऐसा माना जाता है कि यह प्राचीण और प्रमुख मंदिर केवल भगवान शिव को समर्पित किया गया है। यहां पर शिव जी की श्रद्धा पूर्वक पूजा नागेश्वर के रूप में की जाती है।

धार्मिक मान्यताएं

हिन्दू धार्मिक मान्यताओं की माने तो यह मंदिर भगवान शिव को नागों के देवता के रूप में जाना गया है. नागेश्वर का अर्थ होता है नागों का ईश्वर पुराणी धार्मिक कथाओं में ज्योतिर्लिंग के दर्शन की बड़ी महिमा बताई गयी है. ये मंदिर सुबह 5:00 बजे आरती के साथ ही खुल जाता है लेकिन यहां भक्तों को प्रवेश सुबह 6:00 बजे मिलता है। इस मंदिर में पुजारियों द्वारा कई अलग-अलग विधियों से भगवान शिव की श्रद्धा पूर्वक पूजा और अभिषेक किया जाता है। ये मंदिर सावन के महीने में इसके अलावा भगवान शिव के त्योहारों पर विशेष अवसरों पर काफी अधिक समय तक खुला रहता है।

निर्माण कार्य

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास अत्यंत पुराना और पौराणिक माना जाता है, भगवान शिव के इस दसवें ज्योतिर्लिंग का निर्माण अत्यंत अद्भुत और सौंदर्यीकरण विधि से हुआ है। नागेश्वर मंदिर के मुख्य गर्भ ग्रह में निचले स्तर पर भगवान शिव के एक ज्योतिर्लिंग को स्थापित किया गया है। इस ज्योतिर्लिंग के ऊपर चांदी का एक बड़ा सा नाग बनाया गया है, इस ज्योतिर्लिंग के पीछे ही माता पार्वती की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। इस ज्योतिर्लिंग के मंदिर को भी अत्यंत अद्भुत तरीके से बनाया गया है। मान्यताओं के अनुसार जिन श्रद्धालुओं को इस ज्योतिर्लिंग का अभिषेक करना होता है वह यहां के पुजारियों से अनुरोध करके सफेद वस्त्र पहनकर अभिषेक कर सकते है।

नागेश्वर मंदिर कहां है?

यह फेमस और प्राचीन मंदिर भारत के किसी और राज्य में नहीं बल्कि गुजरात के द्वारका में मौजूद है। कहा जाता है कि यह मंदिर ढ़ाई हजार साल से भी अधिक पुराना हैष भारत के लोकप्रिय 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक यह मंदिर नागों के देवता के नाम से भी प्रसिद्ध है।

यहां भगवान शिव की पूजा उनके ज्योतिर्लिंग के रूप में की जाती है और उन्हे यहां दारूकवण नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर परिसर में भगवान शिव की लगभग 25 मीटर ऊंची प्रतिमा भक्तों के लिए काफी लोकप्रिय है।

लोक मान्यताओं के अनुसार यह कहा जाता है कि इस प्रान्त में एक वैश्य रहता था और वो शिव का बड़ा भक्त था। भगवान के भजन में वो इतना मग्न रहता था कि कई बार पानी पीना या खाना भी भूल जाता था। लेकिन वैश्य की पूजा पाठ को भंग करने एक राक्षस पहुंच जाता था। एक बार उसमें वैश्य को कैद कर लिया, लेकिन कैद में भी वैश्य शिव की पूजा-पाठ नहीं छोड़ा। बाद तंग आकर जब राक्षस वैश्य के मित्रों को मारने जा रहा था तभी भगवान शिव प्रकट हुए और उसे बचा लिया। कहा जाता है कि इस घटना के बाद वैश्य को मुक्ति मिल गई और वो हमेशा के लिए शिव लोक में पहुंच गया। इसके बाद इसी स्थान पर ज्योतिर्लिंग की स्थापना की गई।

हिन्दु धर्म में भगवान शिव से सबसे पवित्र और सबसे शक्तिशाली देवता माना जाता है। भारतीय सभ्यता में भगवान शिव इस कदर विराजमान है कि भारत के अलग-अलग प्रान्त में महाकाल संभू, नटराज, भैरव, आदियोगी आदि हजारों नामों से जाना जाता है।

भारत में ऐसे लाखों शिव मंदिर मौजूद हैं जिन्हे विशेष रूप से पूजा जाता है। भगवान शिव को जो विशेष रुप से समर्पित हैं उसमें 12 ज्योतिर्लिंग सबसे पहले शामिल रहते हैं। इन्ही में से एक नागेश्वर ज्योतिर्लिंग है।

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