
प्रयागराज. महाकुंभ को शुरू हुए एक महीना पूरा हो गया है. इस दौरान मौनी अमावस्या को हुई भगदड़ की दुखद घटना को छोड़ दें, स्नान शांति पूर्ण रहा है और 48 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु पवित्र संगम में डुबकी लगा चुके हैं. अभी 26 फरवरी यानी शिवरात्रि तक महाकुंभ चलेगा.
13 जनवरी को महाकुंभ की शुरुआत हुई थी. 4 फरवरी तक तीन अमृत स्नान हुए, जिसमें 13 अखाड़ों ने स्नान किया. अब तक पांच प्रमुख स्नान हो चुके हैं. इस दौरान दुनिया के लगभग तीन दर्जन देशों के श्रद्धालु भी महाकुंभ पहुंचे. सीएम योगी आदित्यनाथ आठ बार से ज्यादा कुंभ का दौरा कर चुके हैं.
महाकुंभ में उमड़े आस्था के सैलाब के बीच प्रयागराज से लगनेवाले जिलों की सड़कों पर जाम की स्थिति देखी जा रही है. लगातार जाम के हालात बने हैं, जो लोग निजी वाहनों से जा रहे हैं. उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. कई बार घंटों जाम की वजह से लोग फंसे रहे, लेकिन आस्था कम नहीं हुई. प्रमुख स्नान के दिनों में प्रयागराज और संगम क्षेत्र को वाहन रहित क्षेत्र घोषित कर दिया गया, जिसकी वजह से प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं की गाड़ी ही कुंभ क्षेत्र में जा पाईं.

वहीं, प्रमुख स्नान के दिन बड़े हनुमान जी यानी लेटे हनुमान जी का मंदिर, अक्षयवट को बंद करना पड़ा, क्योंकि श्रद्धालु की ज्यादा भीड़ संगम क्षेत्र में थी. हालांकि अन्य दिनों में स्थिति सामान्य रही.
29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन जब सबसे ज्यादा श्रद्धालु महाकुंभ नगर पहुंचे, तो ये दुनिया की सबसे आबादी वाला जिला बन गया. हालांकि इस दौरान संगम नोज के पास हुई भगदड़ में कई श्रद्धालुओं की जान चली गयी. सरकार ने 30 का आकड़ा बताया, लेकिन कहा जाता है कि भगदड़ में ज्यादा लोगों की मौत हुई.

वहीं, इसके बाद से प्रशासन सतर्क हो गया और संगम क्षेत्र में सर्विलांस बढ़ा दिया गया. खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रमुख स्नान के दिन भीड़ की मॉनिटरिंग की. वार रूम में वो अधिकारियों के साथ घंटों रहे. जाम की स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त अधिकारियों को लगाया गया. अब मेले में छठा और आखिरी स्नान बचा है. उससे पहले कल्पवास पूरा हो गया है. कल्पवासी वापस जा रहे हैं. अखाड़े भी बसंत पंचमी के बाद वापस जाना शुरू हो गये थे, लेकिन श्रद्धालुओं का तांता महाकुंभ में लगा है.



