Maa Chandrabhaga Shakti Peeth: मां चन्द्रभागा शक्तिपीठ, जूनागढ़, गुजरात
Maa Chandrabhaga Shakti Peeth: देवी भागवत पुराण में 108, कालिकापुराण में 26, शिवचरित्र में 51, दुर्गा शप्तसती और तंत्रचूड़ामणि में शक्ति पीठों की संख्या 52 बताई गई है। साधारत: 51 शक्ति पीठ माने जाते हैं। तंत्रचूड़ामणि में लगभग 52 शक्तिपीठों के बारे में बताया गया है। प्रस्तुत है माता सती के शक्तिपीठों में इस बार प्रभास क्षेत्र चंद्रभागा शक्तिपीठ के बारे में जानकारी।
कैसे बना ये शक्तिपीठ –
जब महादेव शिव जी की पत्नी सती अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में अपने पति का अपमान सहन नहीं कर पाई तो उसी यज्ञ में कूदकर भस्म हो गई। शिवजी को जब यह पता चला तो उन्होंने अपने गण वीरभद्र को भेजकर यज्ञ स्थल को उजाड़ दिया और राजा दक्ष का सिर काट दिया। बाद में शिवजी अपनी पत्नी सती की जली हुई लाश लेकर विलाप करते हुए सभी ओर घूमते रहे। जहां-जहां माता के अंग और आभूषण गिरे वहां-वहां शक्तिपीठ निर्मित हो गए। हालांकि पौराणिक आख्यायिका के अनुसार देवी देह के अंगो से इनकी उत्पति हुई, जो भगवान विष्णु के चक्र से विच्छिन्न होकर 108 स्थलों पर गिरे थे, जिनमें 51 का खास महत्व है।
प्रभास- चन्द्रभागा :-
गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित सोमनाथ मंदिर के निकट वेरावल स्टेशन से 4 किमी. प्रभास क्षेत्र में माता का उदर/आमाशय गिरा था। इसकी शक्ति है चंद्रभागा और भैरव को वक्रतुंड कहते हैं।
गुजरात के प्रभास क्षेत्र में कपिला, हिरण्या एवं सरस्वती नदी के त्रिवेणी संगम के निकट माता शमशान भूमि के निकट सोमनाथ मंदिर के समीप सती के 52 शक्तिपीठों में से एक चंद्रभागा शक्ति पीठ स्थित है। देवी के इस रूप के रक्षण हेतु वक्रतुंड भैरव हमेशा से उनके निकट विराजमान हैं। वर्तमान समय में यह शक्तिपीठ सोमनाथ ट्रस्ट के श्रीराम मंदिर के पिछले हिस्से के ओर व हरिहर वन के निकट स्थित है। प्रभास क्षेत्र में ही भालकातीर्थ नामक स्थान पर श्रीकृष्ण ने अपनी देह का त्याग करने वे अपने लोक चले गए थे।



