Chaitra Navratri 2024: आज से चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो गई है। इन 9 दिनों में माता के नौ रूपों की आराधना की जाती है। इस बार नवरात्रि 9 अप्रैल से 17 अप्रैल तक चलेंगे।
चैत्र नवरात्र के अवसर पर निम्नलिखित 10 महत्वपूर्ण पॉइंट्स को ध्यान में रखा जा सकता है:
1. **महत्व**: चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण है, जो नवरात्रि के नौ दिनों तक चलता है।
2. **पूजा विधि**: नवरात्रि के दौरान, मां दुर्गा की पूजा का विधान है जिसमें नौ दिनों तक नौ रूपों की पूजा की जाती है।
3. **धार्मिक अर्थ**: नवरात्रि का महत्व है क्योंकि इसमें धार्मिक और सामाजिक अर्थ समाहित हैं, जैसे शक्ति की पूजा और आदर्श जीवन के मार्ग का दर्शन।
4. **नौ देवियां**: नवरात्रि के नौ दिनों में हर दिन एक देवी की पूजा की जाती है, जिनमें मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, आदि शामिल हैं।
5. **व्रत और उपवास**: नवरात्रि में लोग व्रत और उपवास रखते हैं और सात्विक आहार का पालन करते हैं।
6. **समाजिक उत्सव**: नवरात्रि के दौरान समाज में खुशियों का वातावरण बनता है, जहां लोग मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना करते हैं और आपसी मिलन-जुलन का आनंद लेते हैं।
7. **संगीत और नृत्य**: नवरात्रि में संगीत और नृत्य के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं, जो लोगों को आनंदित और उत्साहित करते हैं।
8. **सामूहिक पूजा**: कई स्थानों पर लोग सामूहिक रूप से नवरात्रि के अवसर पर मंदिरों में भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं।
9. **धर्मिक भावना**: नवरात्रि के दौरान लोगों की धार्मिक भावनाएं सकारात्मक रूप से उत्तेजित होती हैं और वे अच्छे कर्मों का पालन करने के लिए प्रेरित होते हैं।
10. **आरती और मंत्र**: नवरात्रि के अवसर पर विशेष आरतियाँ और मंत्रों का पाठ किया जाता है, जो मां दुर्गा की पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मां दुर्गा की आरती
जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा मूर्ति .
तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥1॥
मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को .
उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको ॥2॥
कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै.
रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै ॥3॥
केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी .
सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुःखहारी ॥4॥
कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती .
कोटिक चंद्र दिवाकर राजत समज्योति ॥5॥
शुम्भ निशुम्भ बिडारे महिषासुर घाती .
धूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती ॥6॥
चौंसठ योगिनि मंगल गावैं नृत्य करत भैरू.
बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू ॥7॥
भुजा चार अति शोभित खड्ग खप्परधारी.
मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी ॥8॥
कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती .
श्री मालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति ॥9॥
श्री अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै .
कहत शिवानंद स्वामी सुख-सम्पत्ति पावै ॥10॥



