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CG NEWS: राजधानी में गज़ब के स्वास्थ्य केंद्र, जहां न डॉक्टर न स्वास्थ्यकर्मी, मुसीबत में मरीज़…

.. सरोना और चंदनडीह का हाल: लाखों के भवनों में लटका है ताला

सीजी डेस्क। राजधानी रायपुर के सरोना और चंदनडीह में लोगों को प्राथमिक उपचार मुहैया कराने के लिए उप स्वास्थ्य केंद्र तो बनाए गए हैं, लेकिन उन पर लम्बे अरसे से ताला लटका हुआ है। लाखों के स्वास्थ्य केंद्र अब खंडहर में तब्दील होने लगे हैं। सरोना में उप स्वास्थ्य केंद्र सालों पहले बनाया गया था। लेकिन अब यह वीरान पड़ा हुआ है और भवन की खिड़कियां- दरवाज़े तक टूट चुके हैं। कमोबेश यही हाल चंदनडीह उप स्वास्थ्य केंद्र का भी है। दोनों स्वास्थ्य केंद्र बंद होने के कारण स्थानीय निवासियों को मामूली बीमारियों के इलाज के लिए भी जिला अस्पताल या आंबेडकर अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है।

चंदनडीह में न एएनएम की नियुक्ति, न प्रसव की सुविधा, कभी- कभार टीकाकरण का काम

चंदनडीह में बने उप स्वास्थ्य केंद्र को तो अब हमर क्लिनिक बना दिया गया है, लेकिन अभी तक अस्पताल में डॉक्टर और एएनएम की नियुक्ति नहीं हो पाई है। इस स्वास्थ्य केंद्र की दीवार पर 24 घंटे प्रसव की सुविधा की जानकारी लिखी हुई है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यहां उचित संसाधन और एएनएम की नियुक्ति नहीं होने के कारण प्रसव का जोख़िम नहीं ले सकते। वहीं चंदनडीह रहवासियों का कहना है कि क्लिनिक में कभी- कभी स्वास्थ्य कर्मी आकर केवल बच्चों का टीकाकरण करके चले जाते हैं।

सरोना में भी उप स्वास्थ्य केंद्र में लटका ताला, यहां भी कभी- कभार टीकाकरण का काम

सरोना में बने उप स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम की नियुक्ति तो है लेकिन फिर भी अस्पताल के भवन में रोजाना ताला लटका रहता है। सरोना के रहवासियों का भी कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में कभी- कभी स्वास्थ्य कर्मी आकर केवल बच्चों का टीकाकरण करके चले जाते हैं, बाकी उनको मामूली बीमारियों के इलाज के लिए भी जिला अस्पताल या आंबेडकर अस्पताल जाना पड़ता है।

जनप्रतिनिधि से शिकायत, फिर भी सुधार नहीं

सरोना के पार्षद राजेश ठाकुर ने बताया कि चंदनडीह और सरोना में बने उप स्वास्थ्य केंद्र के हाल को देखते हुए वे कई बार विधायक और महापौर से इसकी शिकायत कर चुके हैं। लेकिन अभी तक कोई संतोष जनक सुनवाई नहीं हुई है।

इसीलिए आंबेडकर अस्पताल पर बोझ

उप स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों आदि में बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण मामूली बीमार मरीजों को भी आंबेडकर अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। प्रसव के लिए भी आसपास के गांवो की महिलाओं को आंबेडकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। इसी वजह से आंबेडकर अस्पताल में क्षमता से अधिक मरीज़ पहुंचते हैं। इस अस्पताल में रोजाना 2000 से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं।

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