Manibandh Shakti Peeth: मणिबंध शक्तिपीठ, पुष्कर, अजमेर, राजस्थान
Manibandh Shakti Peeth: राजस्थान में अजमेर के पास विश्व प्रसिद्ध पुष्कर से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर यह शक्तिपीठ है। सती मां की इस शक्तिपीठ की मणिबंध शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है। इसे मणिदेविक मंदिर भी कहते हैं। इस जगह माँ सती के हाथ की कलाई गिरी थी। यह शक्तिपीठ मणिदेविकाशक्तिपीठ और गायत्री मन्दिर के नाम से विख्यात है। यहा के शिव भैरव् सर्वनंदा कहलाते हैं।
देवी भागवत पुराण में 108, कालिकापुराण में 26, शिवचरित्र में 51, दुर्गा शप्तसती और तंत्रचूड़ामणि में शक्ति पीठों की संख्या 52 बताई गई है। साधारत: 51 शक्तिपीठ माने जाते हैं। तंत्रचूड़ामणि में लगभग 52 शक्ति पीठों के बारे में बताया गया है। प्रस्तुत है माता सती के शक्तिपीठों में इस बार मणिदेविका शक्तिपीठ पुष्कर शक्तिपीठ के बारे में जानकारी।
कैसे बने ये शक्तिपीठ :-
जब महादेव शिव जी की पत्नी सती अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में अपने पति का अपमान सहन नहीं कर पाई तो उसी यज्ञ में कूदकर भस्म हो गई। शिवजी को जब यह पता चला तो उन्होंने अपने गण वीरभद्र को भेजकर यज्ञ स्थल को उजाड़ दिया और राजा दक्ष का सिर काट दिया। बाद में शिवजी अपना सती की जली हुई लाश लेकर विलाप करते हुए सभी ओर घूमते रहें। जहां-जहां माता के अंग और आभूषण गिरे वहां-वहां शक्तिपीठ निर्मित हो गए। हालांकि पौराणिक आख्यायिका के अनुसार देवी देह के अंगो से इनकी उत्पति हुई, जो भगवान विष्णु के चक्र से विच्छिन्न होकर 108 स्थलों पर गिरे थे, जिनमें से 51 का खास महत्व है।



