Homeराष्ट्रीयUma Shakti Peeth: वृंदावन में उमा शक्तिपीठ-कात्यायनी शक्तिपीठ

Uma Shakti Peeth: वृंदावन में उमा शक्तिपीठ-कात्यायनी शक्तिपीठ

Uma Shakti Peeth: वृंदावन में उमा शक्तिपीठ-कात्यायनी शक्तिपीठ।
माता के इस सिद्धपीठ को उमा शक्तिपीठ के भी नाम से जाना जाता है। धार्मिक पुराणों के अनुसार, इस मंदिर के स्थान पर देवी सती के केश गिरे थे। इस मंदिर में शक्ति के स्वरूप में देवी उमा और भैरव के स्वरूप में भगवान भूतेष स्थापित है। धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण वृंदावन धाम हिन्दू संस्कृति और इतिहास का एक विशेष केंद्र है।
धर्म नगरी मथुरा के वृंदावन में स्थित है माता का कात्यायनी

उत्तर प्रदेश के धर्म नगरी मथुरा के वृंदावन धाम में माता का कत्यायनी शक्तिपीठ स्थित है। इस मंदिर का नाम प्राचीन सिद्धपीठों में भी जाना जाता है। इस मंदिर को उमा शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है, देवी सती के 51 शक्तिपीठों में से अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राचीन सिद्धपीठ को लेकर कहा जाता है कि यहां देवी सती के केश गिरे थे। इस मंदिर में शक्ति के स्वरूप उमा और भैरव के स्वरुप में भूतेष विराजमान है।

मथुरा में स्थित वृंदावन की इस पवित्र भूमि को भगवान श्रीकृष्ण की क्रीड़ा भूमि कहा जाता है। धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण वृंदावन धाम हिंदू संस्कृति और इतिहास का एक विशेष केन्द्र है। श्रीमद्भागवत गीता में वृंदावन के कई उद्धकरण देखने को मिलते है। तीन ओर से यमुना नदी से घिरे इस नगर की प्राकृतिक छटा भक्तों का मन मोह लेती है। इस धाम में अनेक ऐतिहासिक धरोहर सैकड़ों आश्रम और कई गौशालाएं हैं। वृंदावन धाम के नाम सूरदास, स्वामी हरिदास,चैतन्य महाप्रभु जैसे महान संतो से भी जुड़े है। वृंदावन धाम को विधवाओं का शहर भी कहा जाता है। यहां पर कई विधवा आश्रम है, जहां लोग अपना जीवन यापन करते हैं।

श्रीमद्भागवत में भी है उल्लेख
कात्यायनी शक्तिपीठ के बारे में देवर्षि श्री वेदव्यास ने श्रीमद्भागवत में भी उल्लेख किया है। इस शक्तिपीठ के बारे में श्रीमद्भागवत के दशम स्कंद के 22वें अध्याय में जानकारी मिलती है जिसके अनुसार, यहां राधा रानी ने भगवान श्रीकृष्ण को पति स्वरूप में पाने के लिए पूजा अर्चना की थी।

देवर्षि वेदव्यास में इस खंड को लिखा था, जिसमें उन्होने राधा रानी के पूजन को वर्णित करते हुए लिखा- कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरी देवि पतिं में कुरु ते नम:।। कहा जाता है कि राधा रानी के साथ अन्य गोपीयों ने भी इसी मनोकामना से माता कात्यायनी की यहा पूजा की थी। माता ने सभी को आशिर्वाद दिया था। तभी भगवान श्रीकृष्ण ने गोपीयों के साथ महारास रचाया था।

शक्तिपीठ में दर्शन से मिलता है मनचाहा वर-वधू प्राप्त करने का आशीर्वाद
वृंदावन धाम में स्थित कात्यायनी या उमा शक्तिपीठ में दर्शन को लेकर एक मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। खासकर के यहां पर कुवांरे लड़के और लड़कियां नवरात्र के मौके पर मनचाहा वर और वधु प्राप्त करने के लिए आशिर्वाद लेने आते है। ऐसा कहा जाता है कि जो भी इस मंदिर में माता की सच्चे मन से आरधाना करता है, उसकी मनोकामना शीघ्र ही पूरी हो जाती है।

स्वामी केशवानंद द्वारा बनवाये गए इस मंदिर में माता की एक अष्टधातु की मूर्ति रखी हुई है। माता के अस्त्र शस्त्रों से सुसज्जित इस मूर्ति पर लाल रंग की चुन्नी ओढ़ाई गयी है। संगमरमर से बने इस मंदिर के मुख्य द्वार पर सुनहरे रंग के दो शेर स्थापित किए गए है। इसके साथ ही मंदिर के ऊपरी गुंबद पर दो त्रिशूल के साथ-साथ माता का झंडा फहराता है। इस मंदिर का कई बार जीर्णोद्धार कराया गया, लेकिन मंदिर का मुख्य अंश अभी भी मौजूद है।

लुप्त होने लगा था यह स्थान
प्राचीन कथाओं के अनुसार यह स्थान लगभग लुप्त हो चुका था। जिसके बाद सिद्ध संत श्री श्यामाचरण लाहिड़ी महाराज के शिष्य योगी श्री स्वामी केशवानंद ब्रह्मचारी ने अपने गुरु की आज्ञा पर इस स्थान को खोजा। इसके लिए उन्होने कठोर साधना की और यहां पर मंदिर का पुननिर्माण कराया।

- Advertisement -spot_img
Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
- Advertisement -spot_img
Related News
- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here