
इंदौर. सात वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म करने वाले दुष्कर्मी को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनायी है. कोर्ट ने मामले को रेयर ऑफ रेयरेस्ट माना और दुष्कर्मी को फांसी की सजा सुनायी. माना जा रहा है कि ये राज्य का पहला मामला है, जिसमें पीड़िता के जीवित होने के बाद भी आरोपी की फांसी की सजा कोर्ट की ओर से दी गई है.
दुष्कर्मी ने वारदात को इतनी क्रूरता से अंजाम दिया था कि मासूम के अंग क्षत-विक्षत हो गए थे. लंबे समय तक पीड़ित बच्ची को अस्पताल में रहना पड़ा. उसका कई बार ऑपरेशन करना पड़ा. बड़ी मुश्किल से उसकी जान बच सकी. मृत्युदंड की सजा सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि दुष्कर्मी की वजह से एक मासूम को मृत्यु तुल्य कष्ट हुआ है. बच्ची को इसकी पीड़ा पूरे जीवन भुगतना पड़ेगी, ऐसे में दुष्कर्मी के साथ किसी तरह की रियायत नहीं बरती जा सकती. कोर्ट ने पीड़िता को प्रतिकर राशि के रूप में पांच लाख रुपये दिलवाए जाने की अनुशंसा की है.
दिल को दहला देनेवाली ये वारदात लगभग साल भर पहले 27 फरवरी 2024 को हुई थी. हीरा नगर क्षेत्र की रहनेवाली बच्ची अपनी झोपड़ी के पास खेल रही थी. उसी समय मंगल पंवार मौके पर पहुंचे और बच्ची को मुंह दबा कर उठा ले गया. जिस समय ये घटना हुई, पीड़िता की मां झोपड़ी के पीछे कपड़े धो रही थी.
दिन में सवा तीन बजे के आसपास मां को बच्ची के गायब होने की जानकारी मिली, जिसके बाद उसने खोजना शुरू किया, तो पास के प्लाट में उसके रोने चिल्लाने की आवाज सुनी, जब मौके पर पहुंची, तो मंगल बच्ची के साथ दरिंदगी कर रहा था. वो रोने लगी, तो आस पास के लोग मौके पर पहुंचे, तो दुष्कर्मी मौके से भागने लगा, लेकिन लोगों ने उसे पकड़ लिया. पीड़िता को लेकर परिजन एमवायएच अस्पताल पहुंचे. दरिंदगी की वजह से बच्ची के अंग क्षत विक्षत हो चुके थे. डॉक्टरों को उसके आधा दर्जन से ज्यादा ऑपरेशन करने पड़े, तब जाकर पीड़िता की जान बची.
अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश ( पास्को एक्ट) सविता जड़िया ने निर्णय सुनाया. जज ने अलग-अलग धाराओं में मंगल को तिहरे मृत्यु दंड की सजा सुनायी. मामले में प्रभारी लोक अभियोजन अधिकारी और विशेष लोक अभियोजक संजय मीणा ने दलीलें दीं.



