
रायपुर. सड्डू की VIP CITY के मामले में RERA ने ऐतिहासिक फैसला दिया है, जो आनेवाले दिनों में अन्य कालोनियों के लिए नजीर बनेगा. फैसला पूरन दास साहा की ओर से दायर अपील पर किया गया, जिसके आधार पर RERA की ओर से कमिश्रर नियुक्त करके स्थलीय जांच कराई गई थी, जिसके आधार पर डेवलपर की ओर से दी गई दलीलों को खारिज करते हुए छह माह में सभी सुविधाएं देने का आदेश पारित किया गया है. RERA ने 11 प्वाइंट में मूलभूत सुविधाओं को बहाल करने का आदेश सुनाया है. फैसला RERA अध्यक्ष संजय शुक्ल और सदस्य धनंजय देवांगन ने सुनाया है. अब डेवलपर या तो फैसले को चुनौती देगा या फिर उसे RERA के फैसले के आलोक में सुविधाएं देनी होंगी.
राजधानी रायपुर के सड्डू इलाके में VIP CITY कालोनी है. 260 एकड़ में फैली कालोनी को जब आरसीपी इंफ्राटेक और रवि मार्केटिंग के राकेश पांडेय ने बसाया था, तब यहां फ्लैट, मकान और प्लाट लेनेवालों को वर्ल्ड क्लास सिटी बनाने का वादा किया गया था. इसी के आधार पर कॉलोनी को लेकर जो टैग लाइन दिया गया, उसमें लिखा गया…वीआईपी सिटी…सिटी इन द सिटी यानी शहर के अंदर बसा शहर.
डेवलपर के वादों को देखते हुए पूरन दास साहा ने 2017 में एक प्लाट वीआईपी सिटी में खरीदा, जिसमें उनसे भी वर्ल्ड क्लास सिटी बनाने का वादा डेवलपर की ओर से किया गया. इसको लेकर तैयार ब्रोशर उन्हें दिखाया गया और कहा गया कि जल्द ही सारी सुविधाएं वीआईपी सिटी के अंदर मिलेंगी. प्लाट खरीदने के बाद पूरन दास साहा ने मकान बना लिया और कालोनी के अंदर रहने लगे. उन्होंने समय-समय पर डेवलपर को उसके वादों को याद दिलाई और बकायदा आवेदन देकर याद कराया कि उसके क्या-क्या वादे किये हैं.
2018, 2019 से लेकर 2024 तक लगातार आवेदन डेवलपर को दिये गये, जिसमें कालोनी के विकास और मूलभूत सुविधाएं देने की मांग की गई और याद दिलाया गया कि आपने कालोनी को बसाते समय इसका वादा किया गया था, लेकिन इस पर डेवलपर की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई. कालोनी के लोगों के साथ मिल कर पूरन दासने नगर निगम में भी आवेदन दिया. वहां से भी कोई जवाब नहीं मिला और न ही कोई कार्रवाई हुई. इसके बाद मामला रेरा कोर्ट पहुंचा.
RERA को दिये आवेदन में पूरन दास ने राकेश पांडेय और आरसीपी इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड दोनों को आरोपी बनाया और लिखा कि उन्हें वादे के बावजूद डेवलपर की ओर से सुविधाएं नहीं दी जा रही है. इस पर कोर्ट ने आरसीपी इंफ्राटेक और राकेश पांडेय को नोटिस जारी करके जवाब मांगा, जबाव मिलने के बाद RERA की ओर से मौके की जांच के लिए कमिश्रर नियुक्त किया गया, जिसने जांच की और अपनी रिपोर्ट RERA के सामने रखी, जिसके आधार पर ये फैसला सुनाया गया.
अब आपको बताते हैं कि आखिर फैसले में रेरा की ओर से क्या-क्या कहा गया. यहां ये विचारणीय है कि जो फैसला RERA की ओर से दिया गया है. वो स्थलीय जांच के बाद का है. 11 बिंदुओं के इस फैसले में जो आदेश दिये गये हैं. उन सभी की मांग पूरन कुमार दास ने अपने आवेदन में की थी, लेकिन उसका जवाब देते हुए डेवलपर ने सभी बिंदुओं को खारिज कर दिया था. कई मामलों में कहा था कि ये सुविधा दी जा रही है, लेकिन मौके पर सुविधा नही मिली, जिससे डेवलपर की कलई भी खुली. उसने कैसे RERA अधिकारियों के सामने गलत बयानी की.
डेवलप ने ये किया था वादा
कालोनी बसाते समय डेवलपर ने सेंट्रल प्लाजा, प्रसाधन युक्त लान के भीतर हरा-भरा पार्क, जल निकासी, सड़क किनारे नाली एवं प्लांटेशन, गेट, सेल्फ हाई टेक सिटी, बाउंड्रीवाल, आरसीपी ओवर हेड टैंक, 120, 80 और 40 फीट की कंक्रीट सड़कें, खुली व भूमिगत केबल, सोडियम वेपर, स्ट्रीट लाइट, सोलर लाइट, एसटीपी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, प्रवेश द्वार, प्राकृतिक उद्यान, जागिंग पार्क, चिल्ड्रन पार्क, व्यायामशाला, बहुउद्देश्यीय हाल, 24 घंटे सिक्योरिटी, क्लब हाउस, वाई-फाई व दुकानें बनाने का वादा किया था, लेकिन सालों की बीत जाने के बाद भी कोई भी वादा पूरी तरह से पूरा नहीं हुआ.

रेरा कोर्ट का फैसला
- डेवलपर 60 दिन यानी दो महीनें में कालोनी के लोगों को बिजली के स्थायी कनेक्शन दिलवाए.
- बाउंड्रीवाल जहां टूटी है, उसकी मरम्मत 60 दिन में कराएं, जहां नहीं बनी, वहां दो महीने में बाउंड्री वाल बनाएं
- डेवलपर 60 दिन में कालोनी के भीतर लगातार वाटर सप्लाई की व्यवस्था करे.
- कालोनी की सड़कों पर 60 दिन के अंदर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था की जाए.
- छह महीने के अंदर कालोनी के अंदर के सभी पांचों उद्यान का विकास करें. उद्यान में लगी झाड़ियों को एक महीने के अंदर हटाएं.
- एक महीने में तीनों गेटों पर सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं.
- एक महीने के अंदर कालोनी के अंदर की सड़कों की मरम्मत करें.
- छह महीने के भीतर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण करें.
- 30 दिन के अंदर कवर्ट नालियां बनायी जाएं. ड्रेन का निर्माण कराएं, जिसमें प्रदूषण नहीं फैले. पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था करें.
- चिल्ड्रेन पार्क, जिम, यूटिलिटी शॉप, मल्टी परपस हॉल, वाई-फाई फैसिलिटी, सेंट्रल प्लाजा, वॉटर बॉडी का काम छह माह में पूरा करें.
- कालोनी के अंदर लगी खुली केबुल को छह माह में अंदर ग्राउंड केबुल लगाकर रिप्लेस किया जाए.
रेरा के फैसले से वीआईपी सिटी के लोगों में खुशी है. उन्हें अब इस बात की उम्मीद है कि रेरा के आदेश के बाद डेवलपर की ओर से उन्हें वो सुविधाएं मिलेंगी, जो अब तक नहीं मिल रही थीं, जिसको लेकर उन्हें रेरा तक का सहारा लेना पड़ा. कालोनी के लोगों ने बताया कि जिस तरह कालोनी काटने की शुरुआत हुई थी, उस समय डेवलपर की ओर से पहले आओ, पहले पाओ की स्कीम लागू की गई थी, जिन लोगों ने प्लाट बुक कराया था. उन्हें हेलीकॉप्टर तक की सवारी कराई गई थी और कहा गया था कि वीआईपी सिटी वर्ल्ड क्लास होगी, लेकिन तब से अब तक हालात सुधरने के बजाय बिगड़ते गए. डेवलपर की ओर से कालोनी को विकसित नहीं किया गया. यहां परी तरह से सुविधाएं नहीं दी गईं. लेकिन रेरा के फैसले से इनमें उम्मीद बंधी है.



